योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, धरातल पर दिखना चाहिए असर : मंत्री भूरिया

भोपाल

महिला एवं बाल विकास मंत्री  निर्मला भूरिया ने मंगलवार को मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक के पालन प्रतिवेदन की गहन समीक्षा की। बैठक में विभागीय योजनाओं की प्रगति का जायजा लेते हुए मंत्री  भूरिया ने अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए स्पष्ट किया कि केवल कागजी प्रगति या औपचारिक चर्चाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि हर योजना का वास्तविक परिणाम ज़मीनी स्तर पर दिखाई देना चाहिए।

मंत्री  भूरिया ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशा और लगातार प्रयासों के अनुरूप लाड़ली बहना योजना की हितग्राही महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न रखकर उन्हें सीधे स्व-रोजगार और रोजगार से जोड़ने की दिशा में ठोस पहल की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के विजन के अनुसार लाड़ली बहनों को आत्म-निर्भर बनाने की तैयार की जा रही कार्य-योजना में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जायेगी। उन्होंने महिला वित्त विकास निगम के कार्यों में तत्काल तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही 'IPE ग्लोबल' के साथ 1.6 लाख महिलाओं को जोड़ने के लिए किए गए समझौते पर त्वरित अमल करते हुए एक्सपर्ट विजिट और ग्राउंड वर्क तुरंत शुरू करने के निर्देश दिए।

ये भी पढ़ें :  60 लाख की सड़क बनी दलदल: गड्ढों और झाड़ियों में समाई, ठेकेदार को नोटिस

 भूरिया ने राज्य में बच्चों को कुपोषण से मुक्त कराने के लिए विशेष और त्वरित कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। खंडवा जिले के मोर्टक्का क्षेत्र में बच्चों को ड्राईफ्रूट पाउडर देने का अभिनव प्रयोग किया गया था, जिसके सकारात्मक परिणाम आए हैं। उन्होंने इसकी विस्तृत रिपोर्ट अगले दो दिनों के भीतर हर हाल में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस कार्य में पहले ही काफी देर हो चुकी है, इसलिए प्रक्रिया पूरी कर इसी महीने में इस अभियान को प्रदेश के अन्य जिलों में भी शुरू किया जाए। इसके अलावा, तमिलनाडु में कुपोषण कम करने के लिए अपनाए गए आयुर्वेदिक तरीकों के अध्ययन के लिये बनाई गई टीम को सितंबर तक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने को कहा है। राज्य सरकार ओडिशा, महाराष्ट्र, गुजरात और केरल जैसे राज्यों के सफल कुपोषण निवारण मॉडल्स का भी अध्ययन कर रही है।

ये भी पढ़ें :  प्रशासन का भू-रिकार्ड गड़बड़, भोपाल में ही 30 हजार लोग हैं पटवारी, तहसीलदार के चक्कर लगाने को मजबूर

मंत्री  भूरिया ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं की भर्ती के तहत प्रथम चरण में 92 प्रतिशत और द्वितीय चरण में 67 प्रतिशत नियुक्ति आदेश दिए जा चुके हैं। उज्जैन में आयोजित होने वाले विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री द्वारा कार्यकर्ताओं को नियुक्ति पत्र वितरित कराए जाएंगे, जिसके बाद अन्य जिलों में भी वितरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उन्होंने टेक-होम राशन व्यवस्था को आजीविका फोरम से वापस लेकर विभाग के अधीन स्व-सहायता समूहों को सौंपने के निर्णय पर अगले सप्ताह तक टेंडर एवं वितरण व्यवस्था का पूरा प्रेजेंटेशन देने के भी निर्देश दिए हैं।

ये भी पढ़ें :  स्कूल में पेयजल संकट पर छलका दर्द, 'घर का पानी खत्म होने पर दुकान से खरीदना पड़ता है'

विभागीय कामकाज में पारदर्शिता और गति लाने के लिए मंत्री  भूरिया ने कड़े मानक तय किए हैं। पोषण ट्रैकर के आंकड़ों की सटीकता जांचने के लिए एम्स भोपाल द्वारा विकसित किए जा रहे AI मैकेनिज्म की स्पष्ट समय-सीमा तय करने के निर्देश दिए। साथ ही एनआईएन और निपसिड जैसी राष्ट्रीय संस्थाओं का भी सहयोग लेने की बात कही। सक्षम आंगनवाड़ी-पोषण 2.0, मिशन वात्सल्य और मिशन शक्ति की एकीकृत समीक्षा अब मुख्य सचिव की अध्यक्षता में की जाएगी। मंत्री  भूरिया ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राज्य की सभी योजनाओं में आवश्यक नीतिगत संशोधन, सरलीकरण और उन्हें आपस में जोड़ने का प्रस्ताव अगले 15 दिनों के भीतर तैयार किया जाए, जिसकी समीक्षा 15 दिन बाद दोबारा की जाएगी।

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment